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प्राक्कथन:-

आदि काल से ही मानव मस्तिष्क ज्ञानार्जन हेतु माँ सरस्वती की अर्चना करता रहा है | जिसके परिणाम स्वरूप ऋषिकुल एवं वेदाश्रमो की स्थापनाएँ की गई | जैसा कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण जी के द्वारा कहा गया है कि -

नहीं ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह बिहते |

आस्ष्कि मन स्वीकार करता है कि ईश्वरीय कार्य के सम्पादन के लिए असामान्य आत्माएँ आती है और युग के पटल पर स्वयं को रेखाकिंत कर चली जाती है | उसी पवित्र धारा में योगदान करते चन्द्रवंशावातंस निजकुल कमल श्रीमान बाबू वंशराज सिंह के तनय निजकुल कमल केसरी बाबू रामपूजन सिंह का जन्म सन 1919 आजमगढ़ मण्डलान्तर्गत ग्राम वाँसेपुर (अतरौलिया) में हुआ | किशोरावस्था में वे भारतीय वायु सेना में सम्मिलित हुए | देश की आजादी से ओत-प्रोत हृदय होने के कारण सन 1948 ई० में सेना त्यागपत्र देकर जूनियर हाईस्कुल, कोयलसा में अंग्रेजी विषय का अध्यापन कार्य करना प्रारम्भ किए | कालान्तर से सरस्वती के इस वरद पुत्र को मात्र अध्यापन से संतोष प्राप्त नहीं हुआ | तथा इन्होने सन 1951 ई० में पटेल इण्टर कालेज, अतरौलिया " की स्थापना की | जिसके उत्थान में जीवनपर्यात्न लगे रहे | श्री सिंह ने अपने जीवन में सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यो में अत्याधिक रूचि रखते थे | अतः गौरवशाली व्यक्तित्व के धनी अपना गौरवान्वित जीवन व्यतीत करते हुए ४ अप्रैल सन 1990 में इस पार्थिव शरीर को त्याग करके देव-लोक वासी हो गए |

परिवर्तिनि खलु संसारे मृतः को बा न जयते |
सा जातो एन जातें जाति वंशः समृन्नतिम् ||

उपर्युक्त उक्ति को पूर्वरूपेण परितार्थ करते पटेल मेमोरियल इण्टर कालेज, अतरौलिया एवं रामपूजन स्मारक महाविद्यालय, अतरौलिया के प्रबन्धक श्री जितेन्द्र कुमार सिंह निज पैतृक भावनाओं को पूर्णतया निर्वहन करते हुए सन 2005 ई० में स्वपित्र स्मृति में उक्त उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना की | आशा ही नई पूर्ण विशवास है कि यह महाविद्यालय सामाजिक उत्थान में उत्तरोतर विकास करता रहेगा |

 

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